Log har mor pe ruk ruk ke sambhalate kyon hain

Rahat Indori-लोग हर मोड़ पर रुक रुक के संभलते क्यों है

और नई शायरी पढ़ें अपनी हिन्दी एवं उर्दू भाषा में हमारे इस ब्लॉगर पर :-The spirit of ghazals-लफ़्ज़ों का खेल

Log har mor pe ruk ruk ke sambhalate kyon hain Rahat Indori-लोग हर मोड़ पर रुक रुक के संभलते क्यों है और नई शायरी पढ़ें अपनी हिन्दी एवं उर्दू भाषा में हमारे इस ब्लॉगर पर :-The spirit of ghazals-लफ़्ज़ों का खेल


लोग हर मोड़ पर रुक – रुक के संभलते क्यों है
इतना डरते है तो फिर घर से निकलते क्यों है

मैं ना जुगनू हूँ दिया हूँ ना  कोई तारा हूँ
रौशनी वाले मेरे नाम  और पढ़ें

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