Mirza Ghalib – मिर्ज़ा ग़ालिब की अनमोल शायरी

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BEST POETRY OF GHALIB SHAYARI


इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया  (Ishq Ne Ghalib Nikammaa Kar Diyaa)

गैर ले महफ़िल में बोसे जाम के
हम रहें यूँ तश्ना-ऐ-लब पैगाम के
खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
इश्क़ ने “ग़ालिब” निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के


बाद मरने के मेरे  (Baad marne ke mere ghar se yeh samaan niklaa)

चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ , चंद हसीनों के खतूत .
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला


दिया है दिल अगर ( Diya hai dil agar us ko, bashar hai kya kahiye)

दिया है दिल अगर उस को , बशर है क्या कहिये
हुआ रक़ीब तो वो , नामाबर है , क्या कहिये

यह ज़िद की आज न आये और आये बिन न रहे
काजा से शिकवा हमें किस क़दर है , क्या कहिये

ज़ाहे -करिश्मा के यूँ दे रखा है हमको फरेब
की बिन कहे ही उन्हें सब और पढ़ें »

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