Mere Kuch Sawal Hai Jo Sirf Qayamat Ke Roz Puchunga Tumse

मेरे कुछ सवाल हैं, जो सिर्फ क़यामत के रोज़ पूछूँगा तुमसे


मेरे कुछ सवाल हैं,
जो सिर्फ क़यामत के रोज़ पूछूँगा तुमसे
क्योंकि उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके
इस लायक नहीं हो तुम
मैं जानना चाहता हूँ
क्या उसके साथ चलते हुए   , शाम को यूं ही
बेख़याली में हाथ टकरा जाता है तुम्हारा  ?
क्या अपनी छोटी अँगुलियों से हाथ थाम लिया करती हो क्या वैसे ही, जैसे मेरा थामा करती थीं ?

क्या बता दी सारी बचपन की कहानियां और पढ़ें »

 

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