सदा खुश रहो …….. यही आशीर्वाद हमेशा हमें हमारे बुजुर्गो से मिलता है कि बेटा “सदा खुश रहो” परन्तु क्या हम हमेशा खुश रह पाते हैं ?

शायद खुश रहने की हम स्वयं कोशिश नहीं करते, बल्कि अपनी परिस्थितियों को ही कारण बताकर दुखी रहते है। शिकायत करने की तो जैसे हमारी आदत सी बन गयी है। हर चीज को नकारात्मक तरीके से देखना उसमें कमिया निकलना, उन्हें ही दोषी मानना हमारा उद्देश्य बन जाता है।  सदैव हम सत्य से भागते रहते है, सत्य को झुठलाते रहते है, अपने मन को झूठी तसल्ली देते रहते है। सत्य को स्वीकार करने की हमारे अंदर शक्ति ही नहीं है- ऐसा प्रतीत होता है। अपने झूठे अहम् के कारण हम सदैव सत्य की परिभाषा को भूल जाते जाते हैं। ….तो फिर हम खुश कैसे रह सकते है।

जीवन में  जरूरी है कि हम कुछ नये विचारों को अपनाये, कुछ आदतें बदले जिससे हम अपने आप को खुश रख सकें

शिकायत करने की आदत बदले –

अक्सर हममे दूसरों की शिकायत करने की आदत सी हो जाती है। हमारे साथ कुछ भी बुरा होता है तो हम हम दूसरों को ही कसूर वार मानते है, उसने ऐसा किया होता तो ये न होता उसने वैसा किया होता तो वो न होता, हमेसा अपने आप को बचा कर औरो को दोष देते रहते है, इससे कहीं न कहीं समस्या बढ़ जाती है और हमारे मन की अशांति तो बढती ही है हम औरो की शांति भी भंग कर देता हैं।

सत्य को स्वीकार करें –

सदैव खुश रहने के लिए जरुरी है हम सत्य को माने, सत्य को स्वीकार करें, परिस्थितियों को स्वीकार करें और हमेशा यह मान कर चले कि जो भी होगा अच्छा ही होगा।  अगर हम स्वीकार करने की आदत डाल लेते हैं तो हम हमेशा हमारे जीवन में आने वाले संकटो से लड़ने और उनको सहने के लिए तैयार रहेंगे।

अच्छी संगत में रहें-
कहते है जैसी संगत वैसी रंगत। जैसा हमारे आस पास का वातावरण रहेगा वैसे ही हमारी सोच, हमारे व्यवहार होंगे। इसलिए हमेशा अच्छे लोगो की  संगत में रहना चाहिए ।  अच्छे लोगो की संगत में रहने से और भी कई फायदे है, अच्छे लोग कभी कोई ओछी बात या नीच किस्म की हरकत नहीं करते, अच्छे लोगो के दिल में बड़प्पन होता है, पैसा या अन्य भौतिक चीजे उनके लिए ज्यादा मायने नहीं रखती।  वे हमेशा इंसान और इंसानियत का साथ देते हैं।

खुद को मजबूत बनाये –  जब हम छोटे थे तो पूरी दुनिया बदलने की बात करते थे, पर आज जब हम बड़े हो गए तो खुद को बदलने की बात करते हैं, क्योकि ये वक्त की जरुरत है ।  परिवर्तन ही श्रिस्टी का नियम है और इस नियम को हमें भी अपनाना होगा, हर बदलाव के साथ हमें भी बदलना होगा और हर बदलाव को हमें स्वीकार करना होगा। जब हम बदलाव को, आने वाली चुनौतियों को स्वीकार कर लेते है तो उनसे लड़ने की ताकत भी हमारे मन में आ जाती है। सब कुछ मन पर निर्भर करता है, इसलिए कहा गया है ” मन के हारे हार है मन के जीते जीत “। इसलिए यह आवश्यक है की अपने आप को अपने मन को ताकतवर बनाइये जिससे वह छोटी छोटी बातो से घबरायें नहीं बल्कि चट्टान की तरह सुदृढ़ रह कर हर परिस्थिति का सामना करें।  अक्सर यह देखा जाता है कि जब हम व्यथित होते है तो किसी दोस्त या रिस्तेदार या पडोसी के पास बैठकर उन्हें अपने दुखड़े सुनाने लगते है, बदले में सामने वाला हमें सहानुभूतियाँ देता है।  इससे क्या होता है हमारे मन को थोड़ी सी तसल्ली मिल जाती है, पर हमारी स्थिति वही रहती है पहले वाली, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ होता। पर कभी सोचा है की ऐसा हम क्यों करते हैं ? क्योंकि हम खुद को कमजोर मान लेते है, मन घबरा जाता है, बेचैनी बढ़ जाती है और किसी ऐसे ब्यक्ति की तलास करते है जो हमारे दुखड़े सुन सके। हमें हमारे मन पर काबू पाना चाहिए और खुद को मजबूत इतना मजबूत बनाना चाहिए, कि  वे सारे दुःख सारे गम हमारे मन के हमारे इरादों के आगे छोटे लगने लगे ताकि हमें किसी की झूठी सहानुभूति की आवश्यकता न पड़े।


औरो पर नियन्त्रण न करें – अक्सर देखा जाता है की जब हम औरो पर नियंत्रण रखने की कोशिश ज्यादा करते हैं। हर काम मेरे हिसाब से होना चाहिए, जो भी हो  बिना मेरी परमिशन के न हो, किसी प्रकार की कोई अनुशासनहीनता न हो, मेरे सामने कोई उद्दंडता न करे, बच्चे नियमित रहे, मुझसे डरे, मेरा सम्मान करें, मेरे सामने ऊँची आवाज में बात न करें तमाम इस तरह की बातें हम अपने मन में पाल लेते हैं और मन ही मन अपने आप का एक अलग ही कैरेक्टर बना लेते हैं। परंन्तु जब ये चीजे पूर्ण नहीं होते तो हम दुखी होते है।  इसलिए कोशिश यही करनी चाहिए की हम दूसरों को ज्यादा नियंत्रित करने की कोशिश न करें क्योकि ये बातें भी कहीं न कहीं हमारे मन को दुखी ही करतीं हैं।

माफ करें- जब तक हम किसी को माफ़ नहीं करते तबतक हम उसे, उसके कृत्यों को भूल नहीं सकते। इसलिए जरुरी है किसी के द्वारा अपने प्रति किये गए दुर्व्यवहार को बारबार याद करके दुःखी होने या बदले की भावना को बनाए रखने  से अच्छा  है की हम उसे माफ़ करें औेर भुलाने की कोशिश करें।  क्योंकि जबतक हम  किसी को माफ़ नहीं करेंगे, तबतक हम उसे भूल नहीं सकते। बदले की भावना  पाले रखने से हम दूसरों को बाद में, सबसे पहले आपने आप को दुःख पहुंचाते है, अपने आप को अशांत करते है, मन अशांत होता है तो व्यवहार में परिवर्तन लाजमी है, फिर इस व्यवहार की  वजह से परिवार में अशांति व्याप्त होने लगती है।

..Kumar_Shashi®™….. 

#_तन्हा_दिल…✍Meri Qalam Mere Jazbaat♡

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