बात इतनी पुरानी है

याद फिर भी जबानी है

करूँ कैसे भला मैं बयाँ

ये मुहब्बत की कहानी है

एक ढेला था एक पत्ता
थी मुहब्बत अलबत्ता

दोनों साथ साथ रहते

हर गम को साथ सहते

उनका था बस ये कहना

है साथ जीना मरना

एक रोज आंधी आई
तिनका लगी उड़ाने

पत्ते पे बैठ ढेला

उसको लगा बचाने

जब थम गयी थी आंधी

सांसे हुई थी ​ठंडी

दोनों को चैन आया

दोनों ने गीत गया
एक बार आई बारिस

सबकुछ लगी भीगाने

ढेले पर बैठ पत्ता

उसको लगी बचाने

जब थम गयी थी बरखा

मौसम हुआ था अच्छा

दोनों को चैन आया

दोनों ने मुस्कराया

एक बार हुआ ऐसा
कुदरत का कहर बरसा

बड़ी तेज चली आंधी

संग होने लगी बरखा

पत्ता लगा था उड़ने

ढेला लगा था गलने

दोनों न समझ पाये

कैसे खुद को बचाए

गलता  गया था ढेला

उड़ता गया था पत्ता

दोनो बड़े मजबूर

हो रहे थे दूर दूर

कुदरत का कहर टूटा

दोनों का साथ छूटा
फीकी पड़ी वफाये
वे फिर नहीं मिल पाए

बस यादे बची निशानी

यह मुहब्बत की थी कहानी

यह मुहब्बत की थी कहानी

KumarShashi®™….. 

#_तन्हा_दिल…✍Meri Qalam Mere Jazbaat♡

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