ये गजल या कोई नज्म नहीं है क्योकि वो लिखने की काबिलियत नहीं आई है अभी , बस टू लाइनर्स समझ के पढ़िए और अगर पसन्द या नापसंद आये तो बताइए । क्योंकि लिखना लिखते – लिखते ही आता है।

याद है___
तुमने एक बार अपने दिल पर हाथ रखकर.

मेरे हाथों पर रख दिया था अपना हाथ ….

यकीं दिलाने के लिए की तुम हो …

यूं लगा मानों……

अपनी दो धड़कने छोड़ दी हों………..

…..मेरी हथेली पर

बर सों बीते_लकीरें आज भी ज़िन्दा हैं……….
…तुम्हारी धड़कन से…

यकीं हो ही जाता है……
…..कि_हाँ तुम हो…!!

….Kumar_Shashi®™…..

#dedicated ♡My Love♡

#_तन्हा_दिल…✍Meri Qalam Mere Jazbaat♡

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