मेरे ख्वाबों के दरीचों से झाँकता है कोई .
जब भी देखूं तो लगता है जानता है कोई …

भरी महफिल में भी तन्हा सा हो जाता हूँ .

मेरी आँखों परदा सा तानता है कोई …

मेरे इन्कार में भी कहीँ इकरार सा है .

मेरी हर अदा को पहचानता है कोई ..

लाख परदों में छुप के बैठूं मै .

ढूँढ ही लेता है कहाँ मानता है कोई …

मेरे कानों में सर गोशियाँ सी रहती हैं .

खामोश रातों में जैसे पुकारता है कोई …

मैं चाहूं तो खुद को मल्लिका ए वक्त कह दूँ .

इस जहान में मुझे इतना चाहता है कोई …

..Kumar_Shashi®™…..

#_तन्हा_दिल…✍Meri Qalam Mere Jazbaat♡

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