ज़मी पर रहकर मैने,बहुत ऊँची उड़ान देखी हैं।
रोज़ इक नई सुबहा में मैने,ढ़लती हुई शाम देखी हैं।

महसूस किया हैं मैने,माँ की कमर के दर्द को….

मैने पापा के ऊर्जित तन में भरी हुई ज़रा सी थकान देखी हैं।

मेरे घर के आँगन में सर्द-सुबाहों में,डगमगाते नन्हे कदमो को देखकर…..

मैने बूढ़ी दादी के बेजान शरीर में, आई जान देखी हैं।

और उन्हीं लड़खड़ाते कदमों के पीछे भागती…..

मैने दादा जी के चेहरे पर थकी,और झूमती मुस्कान देखी हैं।

मैने भाई-बहन के झगड़ो में छुपी हुई मज़बूत,….

लेकिन शरारती दोस्ती की पहचान देखी हैं।

हाँ मैने बालू-ईट के मज़बूत घरोंदे में,,,,

रिश्तों की भावुक मग़र मज़बूत सी शान देखी हैं।

….Kumar_Shashi®™…..

#_तन्हा_दिल…✍Meri Qalam Mere Jazbaat♡

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