कहीं-कहीं से हर चेहरा तुम जैसा लगता है
तुम को भूल न पायेंगे हम, ऐसा लगता है

ऐसा भी इक रंग है जो करता है बातें भी

जो भी इसको पहन ले वो अपना-सा लगता है

और तो सब कुछ ठीक है लेकिन कभी-कभी यूँ ही

चलता-फिरता शहर अचानक तनहा लगता है

अब भी यूँ मिलते हैं हमसे फूल चमेली के

जैसे इनसे अपना कोई रिश्ता लगता है

तुम क्या बिछड़े भूल गये रिश्तों की शराफ़त हम

जो भी मिलता है कुछ दिन ही अच्छा लगता है

.. कुमार शशि….. 

#_तन्हा_दिल…✍Meri Qalam Mere Jazbaat♡

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