​ज़िन्दा थे तो किसी ने पास बिठाया नहीं,

अब खुद मेरे चारों ओर बैठे जा रहें हैं…

पहले कभी किसी ने मेरा हाल न पूछा,

अब सभी आँसू बहाए जा रहें  हैं ।

एक रुमाल भी भेंट नहीं किया जब हम ज़िन्दा थें,

अब शालें और कपड़े ओढ़ाये जा रहे हैं ।

कभी किसी ने एक वक्त का खाना तक नहीं खिलाया

अब देसी घी मेरे मुंह में डाले जा रहें हैं

जिंदगी के एक कदम भी साथ न चल सका कोई,

अब फूलों से सजाकर कंधे पर उठाए जा रहे हैं..

आज पता चला कि मौत जिंदगी से कितनी बेहतर हैं

. कुमार शशि….. 

#_तन्हा_दिल…✍Meri Qalam Mere Jazbaat♡

 

Advertisements